फ़लस्तीन के साथ एकजुट भारत — इंसाफ़ और अमन की पुकार

इज़राएल और अमेरिका द्वारा किये जा रहे जनसंहार को तत्काल समाप्त करने की माँग

नई दिल्ली। इंडो-फ़लस्तीन सॉलिडेरिटी नेटवर्क (IPSN) के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में (22 अप्रैल 2025) को भारत में फ़लस्तीन के नवनियुक्त राजदूत श्री अब्दुल्ला अबू शावेश से मुलाक़ात की। यह प्रतिनिधिमंडल वरिष्ठ पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता डॉ. जॉन दयाल तथा वरिष्ठ लेखक विनीत तिवारी के नेतृत्व में गया था। इस मुलाक़ात का उद्देश्य गाज़ा और वेस्ट बैंक में इज़राएल द्वारा जारी हिंसा और अमानवीय हमलों के खिलाफ आवाज़ उठाना और फ़लस्तीनी जनता के साथ एकजुटता जताना था।

मुलाक़ात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने इज़राएल और अमेरिका द्वारा प्रायोजित युद्ध और जनसंहार की तीखी निंदा की और इसकी तत्काल समाप्ति की माँग की। प्रतिनिधिमंडल ने ज़ोर देकर कहा कि इस संघर्ष का हल सिर्फ और सिर्फ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में न्याय के ज़रिए ही संभव है।

राजदूत अबू शावेश ने प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए फ़लस्तीन और इज़राएल के बीच लंबे संघर्ष का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि फ़लस्तीन में ईसाई, यहूदी और मुस्लिम सदियों से मिल-जुलकर रहते आए हैं, लेकिन साम्राज्यवादी ताक़तों ने उन्हें बाँटने का काम किया और वर्तमान त्रासदी की नींव रखी।

डॉ. जॉन दयाल ने कहा, “यह युद्ध दरअसल फ़लस्तीनी बच्चों के खिलाफ युद्ध है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, हर दिन लगभग 100 बच्चे या तो मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि डॉक्टर, पत्रकार, संयुक्त राष्ट्र कर्मी और आम नागरिकों को निशाना बनाकर इज़राएल ने हर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन किया है। उन्होंने इसे “संगठित नरसंहार” करार दिया और इसके खिलाफ वैश्विक आवाज़ बुलंद करने की अपील की।

विनीत तिवारी ने इस अवसर पर राजदूत को महात्मा गांधी के चरखे की प्रतिकृति भेंट करते हुए कहा कि यह प्रतीक है – श्रम, प्रेम, अहिंसा और औपनिवेशिक गुलामी से मुक्ति का। उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनी जनता का संघर्ष न्यायपूर्ण है और वह अवश्य सफल होगा।

इस अवसर पर वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. जया मेहता, पत्रकार मनन कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता सुनीता कुमारी, और युवा प्रतिनिधि शीरीन छिब्बर सहित 17 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने अपने विचार और संवेदनाएँ साझा कीं।

IPSN की ओर से राजदूत को एक औपचारिक एकजुटता-पत्र सौंपा गया जिसमें यह माँग की गई कि जब तक इज़राएल युद्धविराम नहीं करता और मानवीय सहायता नहीं बहाल होती, तब तक उसे सैन्य सामग्री की आपूर्ति बंद की जाए। साथ ही इज़राएली सरकार के उन अधिकारियों पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में मुकदमा चलाया जाए जो फ़लस्तीन पर युद्ध थोपने के लिए ज़िम्मेदार हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा, “हम दुनिया के करोड़ों लोगों के साथ मिलकर एक न्यायपूर्ण और स्थायी शांति की माँग करते हैं।”

मुलाक़ात के अंत में राजदूत अबू शावेश ने एक भावुक संदेश दिया – “नदी से समुद्र तक, हर कोई स्वतंत्र होगा।” प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों ने इस आह्वान को दोहराते हुए फ़लस्तीन के लोगों के संघर्ष के साथ अपने गहरे जुड़ाव को व्यक्त किया। इस प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक अवसर पर राजदूत ने सभी सदस्यों को फ़लस्तीनी परंपरा का प्रतीक ‘कूफ़िए’ पहनाकर सम्मानित किया।

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