सेवा, संकल्प और स्मृति के साथ जिम्मी मगिलिगन को समर्पित सस्टेनेबल सप्ताह का समापन

इंदौर, 23 अप्रैल। पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन के दिवंगत पति, ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश एम्पायर से सम्मानित जेम्स (जिम्मी) मगिलिगन की 14वीं पुण्यतिथि पर आयोजित सस्टेनेबल डेवलपमेंट सप्ताह का समापन ग्राम सनावादिया स्थित उनके निवास गिरिदर्शन में एक प्रार्थना सभा के साथ हुआ।

इस आयोजन का प्रारंभ शंखनाद और बहाई प्रार्थनाओं के साथ हुआ। जनक मगिलिगन  ने जिम्मी को समर्पित भावपूर्ण बहाई छंद गाकर वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। चंडीगढ़ से आए उनके परिजनों  सुभाष पलटा, नीलम वर्मा और अरुण वर्मा  सहित उपस्थितजनों ने आत्मा की प्रगति व एकता पर केंद्रित प्रार्थनाएं कीं। बरली संस्थान की निदेशिका ताहिरा जाधव, आर्यन पाठक और करोलिना ने भी बहाई प्रार्थनाएं अर्पित कीं।

समीर शर्मा ने बहाई धर्मग्रंथ से मृत्यु और आत्मा के अस्तित्व पर आधारित प्रेरणादायक उद्धरण पढ़ा। गुरमीत सिंह नारंग व गुरबख्श ने गुरुबाणी का पाठ किया। इसके पश्चात भजन संध्या में अनुराग शुक्ला, डॉ. सीमा विजयवर्गीय, डॉ. नीरजा पौराणिक, राजेन्द्र ओचानी व गौतम काले के शिष्यों ने भक्ति व प्रकृति से प्रेरित भजनों की मनोहारी प्रस्तुति दी।

जनक मगिलिगन ने भावुक होते हुए कहा: “मैं जो कुछ भी कर पाई, वह जिम्मी द्वारा मेरे और भारत माता के लिए किए गए त्याग की वजह से है। उन्होंने अपना देश छोड़कर भारत में 25 वर्षों तक सेवा दी। उनका प्रेम, समर्पण और मेरी देखभाल ही मेरी शक्ति है। आप सबका साथ मेरे लिए सम्बल है।”

डॉ. गीति वजदी मित्रा ने जिम्मी जी की सेवाभावी जीवन शैली को याद करते हुए कहा: “कर्तव्य + प्रेम + त्याग = सेवा – यही उनका जीवन मंत्र था। वे सच्चे अर्थों में पर्यावरण प्रेमी, शांत, सहज और निस्वार्थ सेवक थे।”

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इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने जिम्मी को इंदौर में सस्टेनेबल डेवलपमेंट के अग्रदूत के रूप में याद किया: “सोलर किचन, ड्रायर, जैविक खेती, जल संरक्षण जैसे काम उन्होंने तब शुरू किए जब लोग इन शब्दों से भी अनभिज्ञ थे। बरली की बेटियों ने जिम्मी-जनक से सीखा और अपने गांवों का कायाकल्प किया।”

कार्यक्रम में जिम्मी एंड जनक मगिलिगन फ़ाउंडेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के ट्रस्टी, पर्यावरणविद, सरकारी अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीण साथी और बहाई समुदाय के अनेक लोग उपस्थित थे।

जनक मगिलिगन के भाई सुभाष पलटा ने कहा: “जनक दीदी ने चंडीगढ़ की नौकरी और सुविधा त्यागकर इंदौर को अपनी सेवा भूमि बनाया। हम उन्हें चंडीगढ़ वापस लाना चाहते थे, पर उन्होंने दृढ़ आस्था और आप सभी के प्रेम के सहारे यहीं सेवा जारी रखी। आज आप सभी उनका सच्चा परिवार हैं।”

कार्यक्रम का संचालन समीर शर्मा ने किया और अंत में ट्रस्टी वीरेंद्र गोयल  ने सभी को धन्यवाद देते हुए संकल्प दिलाया कि इस सस्टेनेबल डेवलपमेंट मिशन को मिलकर आगे बढ़ाया जाएगा।

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