पहाड़ों पर एक और मानव निर्मित आपदा | हमारा पैसा हमारा हिसाब

उत्तरकाशी की सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को 17 दिन बाद निकाला गया है, लेकिन पहाड़ों की नाजुक हालत और विकास की परिकल्पना हमारे सामने है। पिछले ही महीने सिक्किम की बाढ़ भी मानव निर्मित कारणों से ज्यादा तबाही लेकर आई थी। हम विशेषज्ञ सलाहों पर ध्यान दे, और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में करोड़ों की परियोजनाओं को रोक सकें, इसके लिए हमें कितनी और आपदाओं का सामना करना पड़ेगा? इन्ही सवालों के संदर्भ में पेश है सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी टीम व्दारा तैयार ‘हमारा पैसा हमारा हिसाब‘ का नया एपिसोड।
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सागर से अंतरिक्ष तक : रक्षा विमर्श को नई दिशा देती शोधपरक कृति

भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और वैश्विक प्रतिष्ठा से जुड़ा रक्षा विमर्श केवल सैन्य शक्ति का वर्णन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामरिक चेतना का दर्पण होता है। ऐसे समय में वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल की पुस्तक ‘सागर से अंतरिक्ष तक:

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अपने जैसा ‘एआई’

‘आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस’ उर्फ ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ के कसीदे बांचते हुए हम अक्सर इस मामूली सी बात को भूल जाते हैं कि ‘एआई’ आखिरकार एक व्यक्ति और समाज की तरह हमारा ही प्रतिरूप है। यानि हम उस मशीन में जैसा और जितना

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मध्यप्रदेश का बजट : ग्रीन फ्रेमवर्क का दावा, जलवायु संकट की अनदेखी

हाल के मध्यप्रदेश के बजट में तरह-तरह की लोक-लुभावन घोषणाओं के बावजूद पर्यावरण-प्रदूषण से निपटने की कोई तजबीज जाहिर नहीं हुई है। यहां तक कि पर्यावरण के लिए आवंटित राशि भी पिछले साल के मुकाबले घटा दी गई है। आखिर

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