अतीत के प्रति घृणा और बदले की भावना लोगों के मन में घोलने के बजाय देश के वास्तविक विकास के लिए काम करना चाहिए

सरकारों, मीडिया और नागरिकों से की महात्मा गांधी की पौत्री तारा भट्टाचार्य ने अपील

नईदिल्‍ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पोती 89 वर्षीय तारा गांधी भट्टाचार्य ने एक बयान में कहा है कि आज देश में जो कुछ हो रहा है, वह विकट रूप में हमारे सामने है। यह सच है कि राजनीतिक दल और सरकारें देश के लिए अहम होती हैं। पर लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती इसके नागरिकों के साथ जुड़ी होती है। हमें यह याद रखना चाहिए कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की लड़ाई अन्याय के खिलाफ थी और वह नागिरकों की ही एक लड़ाई थी।

हाल ही में जारी किये अपने बयान में तारा भट्टाचार्य ने कहा कि हमारे समाज की नई पीढ़ी का मन नफरत और विद्वेष के भावों से पोषित हो रहा है। उन्‍हें हम ऐसी दुर्भावनाओं की घूँट पिला कर बड़ा कर रहे हैं, जबकि हमारे ये बच्चे व युवा देश के भावी नागरिक हैं। उन्हें प्रेम, करुणा और आपसी भरोसे व सम्मान की सीख देनी है। इन सुंदर भावों से उनके मन का पोषण करना है। उन्हें भविष्य का जिम्मेदार नागरिक बनना है। हमारे देश का विवेक और इसकी स्थिरता इसी युवा पीढ़ी पर निर्भर है।

उन्‍होंने जारी किये अपने बयान में आगे कहा कि ‘’मैं किसी राजनीतिक दल की तरफ से नहीं बोल रही हूं। मैं देश की एक वरिष्‍ठ नागरिक के तौर पर बोल रही हूं। अपने जीवन की उस अवस्था में जब मेरी उम्र 88 वर्ष है और मैं 89वें वर्ष में प्रवेश कर रही हूं, मुझे ऐसा लगता है कि इस समय भारत की गंभीर और भयावह होती स्थिति पर अपना दृष्टिकोण व्यक्त करना चाहिए।‘’

कोरोना महामारी के भयावह दौर से हम गुजर चुके हैं और आज तक हम इससे जूझ रहे हैं। प्रकृति और इंसान के कारण चारो ओर दहशत, दुख व गरीबी नजर आ रही है। पर आज मैं विशेष रूप से अल्पसंख्यकों और देश के अन्य पीडि़त वर्गों से जुड़े मसलों पर चिंता व्यक्त कर रही हूं।

उन्‍होंने चिंता व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि यहां देश में कुछ ऐसे खतरनाक तत्व मौजूद हैं जो कि अलग-अलग समुदायों में अलगाव, घृणा और प्रतिशोध की भावना पैदा कर रहे हैं। जबकि ये सभी समुदाय भारत के ही हैं। आखिर किसी अल्पसंख्यक समुदाय को एक बहुसंख्यक वर्ग से असुरक्षित महसूस क्यों करना चाहिए?

ऐसे समय में जब आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए कई महान चीजें कर रहे हैं, उस वक्त में यह भी एक सच्चाई है कि कुछ हिंसक तत्व इस देश में आतंक का कारण बन रहे हैं और लोगों को आपस में बांटने का काम कर रहे हैं।

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राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय की अध्यक्षा तारा भट्टाचार्य ने सुझाव देते हुए कहा कि सभी ऐतिहासिक और महत्‍वपूर्ण संस्‍थाओं, संग्रहालयों, स्मारकों और पूजास्थलों से संबंधित मौलिक दस्तावेजों का संरक्षण किया जाना चाहिए। लेकिन आज इनके बीच भेद पैदा किया जा रहा। अतीत के प्रति घृणा व दुश्मनी का भाव भरा जा रहा है जबकि देश के वास्तविक विकास के लिए हमारे पास काफी कुछ रचनात्मक काम करने को हैं। क्यों हम अपनी ऊर्जा इस प्रकार की नफरत और प्रतिशोध के भावों का प्रसार करने में बर्बाद कर रहे हैं?  

एक बयान के मुताबिक तारा भट्टाचार्य ने कहा कि वर्तमान स्थिति गंभीर है और इसमें लगातार गिरावट आ रही है। अतीत के प्रति घृणा और बदले की भावना लोगों के मन में घोलने के बजाय हमें देश के वास्तविक विकास के लिए काम करना चाहिए। चिन्तन करना है कि एक स्वस्थ व स्थिर देश के लिए यह जरूरी है कि हम रचनात्मकता से आगे बढ़ें ताकि यह देश विकास के नए पथ पर अग्रसर हो और इसका भविष्य सुंदर हो। एक ऐसा भविष्य जहां मानव मन हिंसा से रहित हो और इसका पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त हो।  

उन्‍होंने कहा कि जब मैं अपने मुस्लिम मित्रों से सुनती हूं कि वे देश में डर व असुरक्षा के बीच रह रहे हैं तो यह बात  मुझे गहरी पीड़ा देती है। यह देश जहां हर हिंदू अपने मुस्लिम मित्रों को उपहार देकर दीवाली मनाता है और हर मुस्लिम अपने सभी हिंदू दोस्तों और अन्‍य समुदायों को सेवइयां खिलाकर ईद मनाता है। क्यों कुछ दूषित तत्‍व इस सुंदर धरती पर रह रहे इन प्यारे लेागों के बीच नफरत और हिंसा फैला रहे हैं ? हमें आपसी सम्मान और संवाद की संस्कृति विकसित करनी ही होगी।

तारा भट्टाचार्य ने कहा कि मैं सरकारों, मीडिया, शैक्षिक संस्‍थानों और इस सुंदर देश के नागरिकों से विनम्र निवेदन करती हूं कि वे सबके कल्याण के लिए सकारात्मक रूप से कार्य करें। बिना किसी जातीय, धर्म व लिंग से जुड़े भेदभाव के इस दिशा में आगे बढ़ें।

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