सेवाग्राम से साबरमती संदेश यात्रा, सरकार अहिंसा की विरासत को खत्म करना चाहती है

संदेश यात्रा दूसरे दिन अकोला, खामगांव पहुंची, ऐतिहासिक सभा का आयोजन

18 अक्टूबर2021। प्रसिद्ध साबरमती आश्रम के स्वरूप में बदलाव के विरुद्ध गाँधीजनों द्वारा चल रही सेवाग्राम से साबरमती संदेश यात्रा दूसरे दिन महाराष्‍ट्र के अकोला से निकलकर खामगांव पहुंची। शहर के बाहर ही यात्रीगण हाथ में बैनर लिए पैदल मार्च करते हुए नारे और गीत के साथ तिलक चौक पहुंचे। यात्रियों ने पहले महापुरुष लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया व उनकी मूर्ति की सफाई की गई। इसके बाद संविधान चौक पहुंचकर गांधी बगीचा में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पुतले को बच्चों के हाथों से माल्यार्पण कराया गया। यहाँ स्थानीय साथियों व तरुणाई फाउंडेशन द्वारा यात्रियों को स्वल्पाहार कराया गया। तीनों महापुरुषों की अदृश्य उपस्थिति से प्रेरणा और शक्ति लेकर यात्रियों का संकल्प और मजबूत हुआ।

सभा में गांधी शांति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कुमार प्रशांत और यात्रा के संयोजक गांधी स्मारक निधि के सचिव संजय सिंह ने बात रखी। उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि 73 वर्ष पूर्व एक हत्यारे की एक गोली ने महात्मा गांधी की आवाज को सदा के लिए खामोश कर दिया था। उनके पार्थिव शरीर को अग्नि को समर्पित कर दिया गया था, परन्तु उनके दिये संदेश को नहीं मिटाया जा सका, जिसके लिए उन्होंने अपना जीवन जिया और शहीद हुए। आज उनकी विरासत को बचाने का हमारा सामूहिक प्रयत्न अवश्य फलीभूत होगा।

सरकार को राष्ट्रीय धरोहरों को नष्ट करने का अधिकार नहीं

उन्‍होंने कहा कि हम सरकार को राष्ट्रीय धरोहरों को नष्ट करने का अधिकार नहीं दे सकते। साबरमती आश्रम उस ऐतिहासिक नमक आंदोलन का गवाह है, जिसने अंग्रेजी साम्राज्यवाद की चूलें हिला दी थी। यह देश के लिए श्रद्धा और प्रेरणा का स्थान है। हम इसे सत्ताधीशों की सनक का शिकार नहीं बनने देंगे।

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कुमार प्रशांत ने कहा कि हम यह यात्रा इसलिए कर रहे है कि गांधीजी द्वारा बनाये हुए साबरमती आश्रम को देखने के लिए साल भर में 3 लाख लोग आते है। 152 साल का आदमी कितने काम का होता अगर आज होता तो पता नहीं, लेकिन अगर देखा जाए तो आज सबसे ज्यादा काम के आदमी वही है। चाहे विज्ञान हो, पर्यावरण हो, शिक्षा हो, अर्थ व्यवस्था हो, चारों तरफ से एक ही आवाज आती है कि रास्ता तो वो गांधी का ही है।

देश का लोकतंत्र गांधी के रास्ते से ही चल सकता है

केंद्रीय गांधी स्‍मारक निधि के मंत्री एवं यात्रा के संयोजक संजय सिंह ने कहा कि देश में  गांधी जी की जो स्मारक है, उसको हम नहीं संभाल पा रहे है। सरकार को भी अब वही जगह दिख रही है, जहां होटल बनाना चाहती है। अब सरकार अहिंसा के विरासत को खत्म करना चाहती है, इसमें लाखों शहीदों की याद जुड़ी हुई है। भारत का लोकतंत्र गांधी के रास्ते से ही चल सकता है यह बात अन्‍य देश के प्रधानमंत्री कहते है। आज़ाद देश में गांधी का आश्रम हम नहीं छोड़ रहे है। उन्‍होंने जनमानस से अपील की कि सभी व्‍यक्ति सोशल मीडिया या अन्‍य माध्यम से आवाज उठाएं।

पर्यावरण विद एवं मेगसेसे अवार्ड से सम्‍मानित राजेन्द्र सिंह ने कहा कि सत्ता कोई भी हो, पीड़ा करती है और पीड़ा कर के डराती है। सरकार कोई भी हक नहीं है कि वे देश को आज़ादी दिलाने वाले बापूजी के मूल्यों को मिटा दें, यह हमारे सामने चुनौती है। उसे लड़ने के लिए हमें निकलना होगा, बापू की विरासत बचाने के लिए आप जरूर आएंगे।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुधाकर अजबे ने कहा कि देश की गरिमा को सरकार द्वारा खत्म करने की कोशिश की जा रही है, वह बेहद दुःखद है। हम सब साबरमती आश्रम के सरकार के बदलाव का विरोध करते है।

कार्यक्रम के समापन में सिंगनाय महाविद्यालय के प्राचार्य निलमा ताई देशमुख ने कहा कि हम सेवाग्राम की कुटिया को देखते है और उससे प्रेरणा लेते है। यह सभी जगह आत्म चिंतन के लिए है, उसे खत्म करने वाले लोगों के खिलाफ है। कार्यक्रम में लता ताई राजपूत, माया ताई, पुष्पा ताई, सत्तू देशमुख का विशेष योगदान रहा।  दोपहर में तिलक राष्ट्रीय विद्यालय में यात्रा दल भोजन कर भुसावल के लिए रवाना हुआ।

यात्रा के आयोजन में गांधी स्मारक निधि, गांधी शांति प्रतिष्ठान, सर्व सेवा संघ, सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान,सर्वोदय समाज, राष्ट्रीय गांधी संग्रहालय, नई तालीम समिति, राष्ट्रीय युवा संघठन, जल बिरादरी, महाराष्ट्र सर्वोदय मंडल तथा गुजरात की सर्वोदय संस्थाएं शामिल हैं। यात्रा में जगह-जगह सर्वधर्म प्रार्थना, गोष्ठी, जन संवाद एवं आदि कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं ।

सेवाग्राम साबरमती संदेश यात्रा का  आयोजन में बुलदाना जिला सर्वोदय मंडल, तिलक राष्ट्रीय विद्यालय, शंकर महर्षि भास्कर राव सिंघने आर्ट्स कालेज, खामगांव, तरुण फाउंडेशन की महत्‍वपूर्ण भूमिका रही। संस्था के सचिव देशमुख, सुधाकर राव एवं स्थानीय सर्वोदय कार्यकर्ताओं का भी उल्‍लेखनीय सहयोग रहा।

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