महिला एवं बाल स्वास्थ्य के मद्देनजर स्वास्थ्य क्षेत्र के लिये बजट प्रावधान बढ़ाया जाए

जन स्वास्थ्य अभियान की सरकार से माँग

इंदौर, 03 मार्च । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 2 मार्च 2021 को कोविड – 19 महामारी के दौर में प्रस्तुत बजट मध्‍यप्रदेश में स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बजट हो सकता था, परंतु उम्मीद से विपरीत प्रस्तुत बजट में स्वास्थ्य के लिये कोई विशेष प्रावधान या बजट में बढ़ोतरी नहीं की गयी है।

जन स्वास्थ्य अभियान के अमूल्य निधि, एस. आर. आजाद एवं राकेश चांदौरे ने जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि प्रदेश के वित्त मंत्री के अनुसार वर्ष 2021 – 22 के लिये प्रदेश का अनुमानित बजट 8046 करोड़ का है, जो कि पिछले अनुमानित बजट से 640 करोड़ अधिक है यानि मात्र 9% अधिक है परंतु वास्तविकता यह है कि आनुपातिक रूप से प्रदेश के कुल बजट में स्वास्थ्य बजट का हिस्सा 7.9% से घटकर 7.3% हो गया है। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं और सूचकांकों की दॄष्टि से यह कटौती चिंताजनक है । कोविड – 19 महामारी से सीख लेकर व वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार स्वास्थ्य में बजट प्रावधान ज्यादा बढ़ाने की जरूरत थी । लगभग 640 करोड़ की कुल बढ़ोतरी में से भी 341 करोड़ रूपये यानि लगभग 53.28% भाग स्वास्थ्य संस्थानों के निर्माण के लिये आवंटित किया गया है व पूंजीगत और राजस्व खर्च के लिये मात्र 299 करोड़ ही बढ़ाया गया है । यदि हम वर्ष 2019-20 के स्वास्थ्य बजट को देखें तो वह 9618 करोड़ था और वर्ष 2020 – 2021 में इसे घटाकर 7406 करोड़ कर दिया था और इस वर्ष भी 9% बढ़कर 8046 करोड़ हुआ यानि पुराने स्तर से अभी भी बहुत कम है। 

इसी प्रकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिये वर्तमान बजट में 3038 करोड़ किया गया है जो कि वर्ष 2020-21 के बजट अनुमान 3035 करोड़ से बहुत थोड़ा ही बढ़ा है, जबकि वास्तविक रूप में यह बजट आवंटन में गिरावट है । महिला एवं बाल स्वास्थ्य के लिये बजट में 2% की वृद्धि बताई गई जबकि वास्तविक संदर्भ में इसमें 2.75% की कमी की गई है । राष्ट्रीय पोषण मिशन का बजट भी 164 करोड़ से घटाकर 155 करोड़ किया गया है। जबकि कुपोषण एवं एनिमिया में मध्यप्रदेश की स्थिति चिंताजनक है । 

ड्रग्स रेग्युलेटरी सिस्टम को मजबूत करने के लिए उपलब्ध योजना में भी लगभग 3 करोड़ रुपए कमी की गई है ।

मध्यप्रदेश के बजट मे केंद्रीय बजट का असर भी साफ देखा जा सकता है जिस प्रकार केंद्रीय बजट में महिला एवं बाल स्वास्थ्य और सुरक्षा की कई योजनाओं का एक योजना में विलय कर बजट प्रावधान कम किये हैं इसी प्रकार प्रदेश के बजट में भी ऐसी कई योजनाओं जैसे बेटी बचाओ, पोषण 2.0 आदि योजना के बारे में कोई आवंटन नहीं दिखता है ।

इन सभी मुद्दों के साथ ही महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सरकार के कुल राजस्व में 33% की बढ़ोतरी बताई गई है, उसके अनुपात में खर्च में कुल 18% की बढ़ोतरी प्रस्तावित की है और वहीं स्वास्थ्य के लिये मात्र 9% बढ़ोतरी प्रस्तावित की है । 

बजट में स्वास्थ्य निरामय योजना का जिक्र किया है परंतु यह योजना किस प्रकार से क्रियान्वित होगी और कोई अलग से प्रावधान नहीं किया गया है ।

इस बजट में 9 मेडिकल कॉलेज का प्रावधान किया है परंतु प्राथमिक स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करने पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है ।

जन स्वास्थ्य अभियान के अमूल्य निधि, एस. आर. आजाद एवं राकेश चांदौरे ने सरकार से माँग की है कि कोविड- 19 महामारी के समय और महिला एवं बाल स्वास्थ्य के कमजोर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र के लिये बजट प्रावधान को बढ़ाया जाए और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं खासकर प्राथमिक सेवाओं को मजबूत करने के लिये विशेष प्रावधान किये जाये साथ ही साथ प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सक, मानव संसाधन, दवा आपूर्ति आदि में व्याप्त कमी को देखते हुए यह बजट प्रावधान बहुत कम है, इसे बढ़ाये जाने पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

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